
• 5 अगस्त को CM कैम्प में शिकायत, 16 को बनी जांच टीम, 20 को बयान दर्ज; फिर भी कार्रवाई शून्य!
- फेडरेशन ने गारीघाट प्रवास पर मुख्यमंत्री को सीधे सौंपा ज्ञापन, उठ रहे ‘जीरो टॉलरेंस’ पर सवाल??
- जनपद उपाध्यक्ष ने भी CM को लिखा पत्र, BEO दुर्गेश देवांगन को तत्काल हटाने की मांग!
जशपुर/फरसाबहार:-मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के गारीघाट प्रवास के दौरान छत्तीसगढ़ सहायक शिक्षक/समग्र शिक्षक फेडरेशन के एक प्रतिनिधिमंडल ने उनसे सीधी मुलाकात कर एक अहम ज्ञापन सौंपा। फेडरेशन ने इस मौके पर मुख्यमंत्री का ध्यानाकर्षण उनके ही गृह व विधानसभा क्षेत्र (फरसाबहार) में शिक्षा विभाग के भीतर चल रही विसंगतियों, लाखों की कथित अवैध वसूली और भ्रष्ट अफसरों को मिल रहे संरक्षण की ओर कराया है। फेडरेशन ने स्पष्ट किया है कि निचले स्तर पर जांच के बावजूद जब कोई कार्रवाई नहीं हुई, तो न्याय की गुहार लगाने उन्हें सीधे प्रदेश के मुखिया के पास आना पड़ा।
15 मिनट की देरी पर नपते हैं शिक्षक, लाखों की वसूली पर ‘मौन’?
मुख्यमंत्री को सौंपे गए ज्ञापन के माध्यम से शिक्षा विभाग में चल रहे ‘सिस्टम’ के दोहरे चरित्र को बेनकाब किया गया है। फेडरेशन ने अवगत कराया कि विभाग में ऐसा दोहरा मापदंड है जहां एक तरफ मामूली चूक या महज 15 मिनट की देरी पर शिक्षकों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया जाता है, वहीं दूसरी तरफ ब्लॉक स्तर के शीर्ष शिक्षा अधिकारियों पर ₹50,000 से लेकर ₹1,00,000 तक की अवैध वसूली और पद के दुरुपयोग के गंभीर लिखित साक्ष्य मिलने के बावजूद उन पर मेहरबानी बरती जा रही है।

वसूली का नेक्सस और मानसिक प्रताड़ना के गंभीर आरोप!
फेडरेशन की फरसाबहार ब्लॉक इकाई के अध्यक्ष नरेश कुमार यादव और ब्लॉक सचिव खुशानंद पैंकरा सहित अन्य प्रतिनिधियों के अनुसार, BEO दुर्गेश देवांगन, ABEO और BRCC द्वारा स्कूलों का औचक निरीक्षण कर जानबूझकर छोटी-मोटी कमियां निकाली जाती हैं। इसके बाद निलंबन और स्थानांतरण का डर दिखाकर उसे समाप्त कराने, PFMS भुगतान और अनुकूल प्रतिवेदन के नाम पर शिक्षकों से 50 हजार से लेकर 1 लाख रुपये तक की मांग की जाती है। शिकायत में यह भी गंभीर आरोप है कि महिला शिक्षिकाओं को देर रात तक कार्यालय में बैठाकर मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जाता है। विरोध करने पर विभागीय प्रतिशोध की खुली धमकियां दी जाती हैं।
जांच के बाद भी सन्नाटा, इसलिए सीधे मुख्यमंत्री से करनी पड़ी शिकायत!
फेडरेशन के ब्लॉक सचिव खुशानंद पैंकरा ने मुख्यमंत्री को गारीघाट प्रवास के दौरान ध्यानाकर्षण कर बताया कि इस पूरे मामले की शिकायत 5 अगस्त को ही कलेक्टर जशपुर और ‘सीएम कैम्प कार्यालय, बगिया’ में कर दी गई थी।
जनआक्रोश के बाद 16 अगस्त को कलेक्टर रोहित व्यास ने 3-सदस्यीय जांच समिति (सीईओ जिला पंचायत, डीईओ और लेखाधिकारी) का गठन किया।
20 अगस्त को गठित जांच दल ने लगभग 9 पीड़ित शिक्षकों के बयान भी दर्ज कर लिए।
इसके बावजूद, संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध निलंबन या उन्हें पद से हटाने जैसी कोई कार्रवाई नहीं की गई। इसी प्रशासनिक ढिलाई और अफसरों को मिल रहे कथित संरक्षण को देखते हुए फेडरेशन ने सीधे मुख्यमंत्री के गारीघाट प्रवास पर उनसे मिलकर यह मुद्दा उठाया।
जनप्रतिनिधियों का भी मिला साथ!
इस मामले में फेडरेशन के अलावा फरसाबहार जनपद पंचायत की उपाध्यक्ष श्रीमती संध्या सत्यम सिंह ने भी मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर BEO दुर्गेश देवांगन की कार्यशैली का कड़ा विरोध दर्ज कराया है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि नकद वसूली और अपारदर्शिता के कारण शिक्षा विभाग की छवि धूमिल हो रही है, इसलिए BEO को तत्काल मुख्यालय से हटाया जाए।
मुख्यमंत्री के समक्ष फेडरेशन की प्रमुख मांगें!
जांच को निष्पक्ष बनाए रखने के लिए संबंधित BEO, ABEO एवं BRCC को तत्काल प्रभाव से विकासखंड के प्रशासनिक दायित्वों से हटाया जाए।
छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (आचरण) नियमों और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत दोषियों पर प्राथमिकी (FIR) दर्ज कर कड़ी दंडात्मक कार्रवाई की जाए।
शिकायतकर्ता शिक्षकों को किसी भी प्रकार की प्रतिशोधात्मक कार्रवाई या प्रताड़ना से पूर्ण प्रशासनिक सुरक्षा प्रदान की जाए। मुख्यमंत्री ने फेडरेशन के प्रतिनिधिमंडल की बातों को गंभीरता से सुना और ज्ञापन स्वीकार करते हुए मामले का संज्ञान लिया है। पीड़ित शिक्षकों और फेडरेशन को अब पूरा भरोसा है कि मुख्यमंत्री के सीधे हस्तक्षेप के बाद, उनके ही गृह क्षेत्र में ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति धरातल पर उतरेगी और भ्रष्ट आचरण वाले अधिकारियों पर त्वरित और सकारात्मक कार्रवाई होगी।
