
- शिकायत और जांच के एक माह बाद भी भ्रष्ट अधिकारियों पर कार्रवाई नहीं, सीएम के गृह जिले में ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति पर उठे सवाल, हताश शिक्षकों ने दी न्यायालय जाने की चेतावनी।
जशपुरनगर:- जहाँ पूरे भारत में शाम होते ही शासकीय कार्यालयों के दरवाजों पर ताले लटक जाते हैं, वहीं जशपुर जिले के कुनकुरी विधानसभा अंतर्गत फरसाबहार विकासखंड का बीईओ (BEO) कार्यालय शाम 4 बजे के बाद ‘भ्रष्टाचार की दुकान’ में तब्दील हो जाता था। यहां पदस्थ ब्लॉक शिक्षा अधिकारी (BEO) दुर्गेश देवांगन और उनके सहयोगी एबीईओ रविन्द्र साय पैंकरा (ABEO) व बीएआरसी (BARC) देवेंद्र सिंह पर आदिवासी शिक्षकों को डरा-धमकाकर लाखों रुपये की अवैध वसूली और महिला शिक्षिकाओं को देर रात तक कार्यालय में बैठाकर मानसिक शोषण करने का गंभीर आरोप लगा है।
छत्तीसगढ़ सहायक शिक्षक/समग्र शिक्षक फेडरेशन ब्लॉक इकाई फरसाबहार ने इस पूरे मामले की शिकायत 5 अगस्त को जिला कलेक्टर और मुख्यमंत्री कैंप (बगिया) में की थी। आरोप है कि एक सुनियोजित तरीके से आदिवासी समुदाय के महिला-पुरुष शिक्षकों को सस्पेंड करने और एफआईआर (FIR) का डर दिखाकर भयादोहन किया गया। शिकायत के बाद 16 अगस्त को जांच दल गठित हुआ और 20 अगस्त को बयान भी दर्ज हुए, लेकिन अब सितंबर माह बीतने को है और भ्रष्ट अधिकारियों पर कोई प्रशासनिक गाज नहीं गिरी है। सूबे के आदिवासी मुख्यमंत्री के गृह जिले में ही आदिवासी शिक्षकों के इस खुले शोषण और प्रशासन की चुप्पी ने सरकार की ‘भ्रष्टाचार मुक्त व जीरो टॉलरेंस’ नीति को कटघरे में खड़ा कर दिया है। कार्रवाई न होने से क्षुब्ध शिक्षक और फेडरेशन अब आर-पार की लड़ाई के मूड में हैं और उन्होंने सीधे न्यायालय का दरवाजा खटखटाने का ऐलान कर दिया है।
आइए जानते हैं पीड़ित शिक्षकों की दर्दनाक कहानी, उन्हीं की जुबानी…!
15 मिनट की देरी पर मै हुई सस्पेंड, फिर हमारी शिकायत पर जाँच होने के बाद भी कार्यवाही क्यो नहीं..?
श्रीमती सुमंती तिर्की (शिक्षिका, प्राथमिक शाला सिकिरमा)
“मैं तकनीकी गड़बड़ी (VSK App) के कारण उपस्थिति दर्ज नहीं कर पाई और केवल 15 मिनट की देरी से स्कूल पहुंची थी। इसके लिए मुझसे 3 दिन पहले ही स्पष्टीकरण मांगा गया और जवाब देने के बावजूद मुझे सस्पेंड कर दिया गया। पिछले सत्र में भी मुझे और कई अन्य महिला शिक्षिकाओं को रात 7 बजे तक कार्यालय में बैठाकर मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया था। समझ नहीं आता कि इतनी शिकायतों के बाद भी प्रशासन इन पर कार्रवाई क्यों नहीं कर रहा है? अगर इन्हें नहीं हटाया गया तो हम एकजुट होकर कोर्ट जाएंगे।”
स्वीपर के हंगामे की आड़ में 75 हजार की वसूली
श्रीमती सुचिता तिग्गा (प्रधानपाठिका, प्राथमिक शाला तुबा):
“कैंपस के प्राइमरी स्कूल के एक स्वीपर ने बीईओ कार्यालय में नशे में हंगामा किया था। इसके एवज में मुझे शाम 4:30 बजे कार्यालय बुलाकर धमकाया गया, जबकि मैं मिडिल स्कूल की एचएम हूं। बाद में अधिकारी मेरे स्कूल आए और मेरी ऑडिट हो चुकी कैश बुक में जानबूझकर गलतियां निकालकर मुझे एफआईआर दर्ज करने की धमकी दी। मुझसे 2 लाख रुपये की मांग की गई और सस्पेंशन के डर से मैंने उन्हें 75,000 रुपये दे दिए।”
रात 9:30 बजे तक कार्यालय में बैठाकर 80 हजार की घूसखोरी
श्रीमती निशंकला तिर्की (प्रधान पाठक, प्राथमिक शाला डुमरजोर भेलवा):
“मैं प्रधान पाठक के पद पर पदस्थ हूं। मेरे स्कूल में अचानक निरीक्षण के लिए आए बीईओ (BEO दुर्गेश देवांगन) और बीआरसी (BRC देवेंद्र सिंह) ने पंजियों में त्रुटि निकालकर मुझे शाम 4 बजे के बाद फरसाबहार कार्यालय बुलाया। मेरे द्वारा दिए गए स्पष्टीकरण को अमान्य कर दिया गया और मुझे बगीचा या जशपुर भेजने व सस्पेंड करने की धमकी दी गई, जिससे मैं काफी डर गई। मुझे रात 9:30 बजे तक कार्यालय में बैठाकर रखा गया।
इसके बाद बीआरसी ने मुझे एक कमरे में बुलाकर सस्पेंशन से बचने के लिए 1 लाख रुपये की मांग की। जब मैंने इतनी बड़ी रकम देने में असमर्थता जताई, तो मैंने बीईओ (BEO) दुर्गेश देवांगन से बात की, जिन्होंने 80 हजार रुपये की मांग की और रकम कम करने से साफ इनकार कर दिया। इसके बाद भी मुझे कार्यालय बुलाया गया। सस्पेंड होने के डर के मारे मैंने किसी तरह पैसों का इंतजाम किया और 80,000 रुपये बीआरसी देवेंद्र सिंह के हाथों में दे दिए। मेरी मांग है कि इन अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई हो और इन्हें यहां से हटाया जाए।”
फर्जी वेंडर बताकर डिक्की में रखवाए 80 हजार रुपये सिप्रियन लकड़ा (शिक्षक, प्राथमिक शाला भेलवा):
“सहायक शिक्षकों ने बिना मेरी जानकारी के मुझे फर्जी वेंडर बना दिया और मेरे नाम से इको क्लब (2000 रुपये), एफएलएन (500 रुपये) और जादुई पिटारा (2000 रुपये) की राशि निकाल ली। बीईओ (BEO) और बीआरसी (BRC) की जांच में यह बात सामने आने पर मुझे कार्यालय बुलाया गया, लेकिन मेरा स्पष्टीकरण दरकिनार कर दिया गया। एबीईओ (ABEO रविन्द्र साय पैंकरा) ने मुझे सस्पेंड करने और 4-5 साल तक बहाल न होने की धमकी दी। सस्पेंशन से बचने के लिए मुझसे 1 लाख रुपये की मांग की गई। डरा-धमकाकर मुझसे 80 हजार रुपये में सौदा तय किया गया, जिसे तपकरा बुलाकर एक डिक्की में रखवाया गया। मैंने कलेक्टर द्वारा गठित जांच समिति को अपना लिखित बयान दे दिया है। हमारी मांग है कि दोषियों पर कड़ी कार्रवाई हो, और यदि प्रशासन हमें न्याय नहीं देता है, तो हम न्यायालय (कोर्ट) का दरवाजा खटखटाएंगे।”
GK बोर्ड के बहाने कार में लिए 50 हजार
समसोन लकड़ा (शिक्षक, मा. वि. बाबूसाजबहार):
“सामान्य ज्ञान (GK) बोर्ड अपडेट न होने का बहाना बनाकर स्कूल के एचएम व संकुल समन्वयक के बजाय केवल मुझे नोटिस दिया गया। शाम 4 बजे के बाद मेरे को कार्यालय बुलाकर दूसरों को फंसाने का दबाव डाला। जब मैंने मना किया तो सस्पेंड करने का डर दिखाकर एबीईओ रविंद्र साय पैंकरा ने 1 लाख की रिश्वत मांगी। मेरी आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी, इसलिए 50 हजार में बात तय हुई। कर्ज लेकर पैसे जुटाए जिसे एबीईओ रविन्द्र साय पैंकरा ने रास्ते में अपनी कार में रखवा लिया।”
बिना गलती सस्पेंड कर वसूले 33 हजार
हेरमोन कुजूर (प्रधानपाठक, प्रा. वि. ख़ैरडीपा):
”23 मार्च को मुझे बिना किसी गलती के निलंबित कर दिया गया, जबकि कथित घटना के दिन मैं स्कूल में ही उपस्थित था। इसके बाद 1 जून को मुझे आरोप पत्र भेजकर बयान दर्ज कराने के लिए बुलाया गया, जहां एबीईओ (ABEO) ने धमकी दी कि यदि मैंने उनके मनमुताबिक बयान नहीं दिया, तो मेरे खिलाफ कार्रवाई की जाएगी और मेरा वेतन रोक दिया जाएगा। मामले को रफा-दफा करने के एवज में एबीईओ द्वारा 35,000 रुपये की रिश्वत मांगी गई और दबाव बनाकर मुझसे 33,000 रुपये वसूल लिए गए। इस बेवजह की धमकी और पैसों की मांग से मुझे भारी मानसिक प्रताड़ना झेलनी पड़ी है। मेरी स्पष्ट मांग है कि दोषी बीईओ (BEO), एबीईओ (ABEO) और बीएआरसी (BARC) को तत्काल प्रभाव से फरसाबहार से हटाया जाए या उन्हें सस्पेंड किया जाए।”
कार्रवाई नहीं हुई, अब अदालत की शरण लेगा फेडरेशन नरेश कुमार यादव (ब्लॉक अध्यक्ष, छ.ग. सहायक/समग्र शिक्षक फेडरेशन):
”हमारे संगठन को शिक्षक साथियों से लिखित शिकायत मिली है कि ब्लॉक केh अधिकारी (BEO, दुर्गेश देवांगन,ABEO, रविन्द्र साय पैंकरा,और BRC देवेंद्र सिंह ) उन्हें मानसिक और आर्थिक रूप से भारी प्रताड़ित कर रहे हैं। शिक्षकों को डरा-धमकाकर उनसे 20 हजार से लेकर 1 लाख रुपये तक की अवैध उगाही की गई है।
इस अन्याय के खिलाफ हमने हर स्तर पर शिकायत की है। हमने सरगुजा विकास प्राधिकरण की उपाध्यक्ष व विधायक श्रीमती गोमती साय के निवास पर जाकर उन्हें पूरी स्थिति से अवगत कराया। इसके बाद हम बगिया स्थित सीएम (CM) कैंप कार्यालय भी गए, जहां पीड़ित शिक्षकों ने अपना दुखड़ा सुनाया और मुख्यमंत्री के नाम लिखित शिकायत सौंपी। हमने कलेक्ट्रेट में भी शिकायत दर्ज कराकर निष्पक्ष जांच और दोषियों पर सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की थी।
कलेक्टर महोदय के निर्देश पर 16 तारीख को एक जांच दल गठित किया गया, जिसने हमें 20 अगस्त को जशपुर बुलाया। वहां जिला पंचायत के सभागार में हमने जांच दल, डीईओ (DEO), लेखा अधिकारी और जिला पंचायत सीईओ (CEO) के समक्ष अपने सारे साक्ष्य, लिखित और मौखिक बयान प्रस्तुत कर दिए।
हमें पूरा विश्वास था कि न्याय होगा, लेकिन अब सितंबर का महीना आ गया है और प्रशासन की तरफ से अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। इस लेटलतीफी और कार्रवाई न होने से पीड़ित शिक्षक और संगठन के लोग बेहद दुखी और आक्रोशित हैं। प्रशासन के इस रवैये को देखते हुए हमने कल संगठन की एक बैठक बुलाई है। अब हमारी आगे की रणनीति यही है कि हम न्याय पाने के लिए अदालत (कोर्ट) की शरण लेंगे, और हमारा संगठन सभी पीड़ित शिक्षकों को न्याय दिलाने के लिए अदालत में उनकी पूरी मदद करेगा।”
आपको बता दे कि यह पूरा घटनाक्रम शिक्षा विभाग के दामन पर एक बदनुमा दाग है। जहाँ एक ओर सरकार शिक्षा के स्तर को सुधारने का दावा करती है, वहीं फरसाबहार में शिक्षा के मंदिर को वसूली का अड्डा बना दिया गया है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि न्यायालय की चेतावनी के बाद कुंभकर्णी नींद में सोया प्रशासन जागता है या फिर भ्रष्ट अधिकारियों को इसी तरह संरक्षण मिलता रहेगा।
