
जशपुरनगर:-भारतीय जनता पार्टी द्वारा चलाए जा रहे ‘सेवा संकल्प’ अभियान पर जशपुर जिला कांग्रेस अध्यक्ष एवं पूर्व विधायक यू.डी. मिंज ने कड़ा राजनीतिक हमला बोला है। उन्होंने अभियान को केवल प्रचार और दिखावे की राजनीति करार देते हुए कहा कि जिस कार्यक्रम को भाजपा ‘सेवा संकल्प’ का नाम दे रही है, वह वास्तव में जमीनी हकीकत पर ‘विश्वासघात संकल्प’ बनकर रह गया है।
पूर्व विधायक ने आरोप लगाया कि यह पूरा अभियान केंद्र की मोदी सरकार और छत्तीसगढ़ की विष्णु देव साय सरकार की प्रशासनिक असफलताओं, रिकॉर्ड तोड़ महंगाई, गंभीर बेरोजगारी और बढ़ती आर्थिक विषमता से जनता का ध्यान भटकाने का एक सुनियोजित प्रयास है।
महंगाई, बिजली दरें और जनता पर आर्थिक बोझ
यू.डी. मिंज ने राज्य के मौजूदा आर्थिक हालात पर सवाल उठाते हुए कहा कि बिजली के दामों में लगातार की जा रही वृद्धि ने आम जनता की जेब पर सीधा डाका डाला है। इसके साथ ही ‘स्मार्ट मीटर’ योजना को लेकर उपभोक्ताओं के बीच भ्रम, डर और असमंजस की स्थिति बनी हुई है। उन्होंने कहा कि एक तरफ सरकार महतारी वंदन योजना का ढिंढोरा पीट रही है, लेकिन जमीनी स्तर पर महिलाओं के बीच योजना के क्रियान्वयन को लेकर गहरी अपेक्षाएं और सवाल अनुत्तरित हैं। ऐसे समय में भाजपा का सेवा की बात करना जनता के जख्मों पर नमक छिड़कने जैसा है।
केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कांग्रेस जिलाध्यक्ष ने कहा कि भाजपा को ‘सेवा’ का राग अलापने से पहले वर्ष 2014 में देश से किए गए संकल्पों का ऑडिट रिपोर्ट पेश करना चाहिए। उन्होंने सवाल उठाए कि,प्रति वर्ष 2 करोड़ युवाओं को रोजगार देने के वादे का क्या हुआ?
स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों के आधार पर किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) और आय दोगुनी करने के दावों की क्या स्थिति है?
हर गरीब के सिर पर पक्की छत और हर घर तक शुद्ध नल जल पहुँचाने की प्रगति क्या है?
विदेशों से काला धन वापस लाकर देशवासियों के खातों में पहुँचाने के वादे का क्या हश्र हुआ?
उन्होंने कहा कि नोटबंदी, जीएसटी के जटिल स्वरूप और विवादित कृषि कानूनों जैसे फैसलों ने देश की अर्थव्यवस्था और मध्यम वर्ग की कमर तोड़ दी है।
युवाओं और छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ का आरोप
यू.डी. मिंज ने साय सरकार की नीतियों पर हमला बोलते हुए कहा कि राज्य में युवाओं के लिए कोई ठोस और टिकाऊ रोजगार रोडमैप नहीं है। उन्होंने कहा कि निजी कंपनियों और कारपोरेट प्लेसमेंट मेलों को सरकारी रोजगार के रूप में पेश करना बेरोजगार युवाओं के साथ क्रूर मजाक है।
इसके अलावा, शिक्षा व्यवस्था की बदहाली पर चिंता व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि प्रदेश के स्कूलों में शिक्षकों और बुनियादी सुविधाओं के भारी अभाव के चलते आज स्कूली छात्र-छात्राएं अपनी मांगों को लेकर सड़कों पर उतरने को विवश हैं। सरकार वास्तविक सुधार करने के बजाय केवल इवेंट मैनेजमेंट और पीआर स्टंट में मस्त है।
प्रशासनिक भ्रष्टाचार और छोटे कर्मचारियों पर कार्रवाई पर सवाल उठाते हुये पूर्व विधायक ने आरोप लगाया कि राज्य के जल संसाधन, शिक्षा, स्वास्थ्य और ट्राइबल (आदिम जाति कल्याण) विभागों में भ्रष्टाचार चरम पर पहुँच चुका है। धान खरीद और वितरण तंत्र में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं सामने आ रही हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार केवल दिखावे के लिए छोटे स्तर के कर्मचारियों पर कार्रवाई का चाबुक चलाती है, जबकि भ्रष्टाचार के मुख्य कर्ताधर्ता बड़े अधिकारियों को उच्च स्तर से संरक्षण दिया जा रहा है।
छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव के समय भाजपा द्वारा जारी किए गए घोषणापत्र (‘मोदी की गारंटी’) का जिक्र करते हुए मिंज ने कहा कि सरकार अपने कार्यकाल का एक लंबा समय निकाल चुकी है, लेकिन अधिकांश प्रमुख वादों पर चुप्पी साधे हुए है उन्होनें आरोप लगाया कि ₹500 में गैस सिलेंडर: चुनावी वादा अब तक कागजों में सीमित।
अनियमित कर्मचारियों का नियमितीकरण लाखों संविदा व अनियमित कर्मी अब भी सड़क पर।
एक लाख सरकारी भर्तियां और बेरोजगारी भत्ता: कोई स्पष्ट समय-सीमा नहीं।
बिजली बिल हाफ: 400 यूनिट तक बिल आधा करने की नीति का अता-पता नहीं।
छात्रों के लिए मुफ्त बस पास व किसानों को ₹3100 धान खरीद व त्वरित भुगतान: जमीनी स्तर पर भारी अव्यवस्था।
प्रचार से नहीं, वास्तविक काम से बनेगी बात”??
अपने बयान के अंत में यू.डी. मिंज ने दो टूक कहा कि लोकतंत्र में जनता खोखले नारों, चमकदार विज्ञापनों और फोटो-ऑप इवेंट्स से नहीं बहलती। जनता को अपने अधिकारों, पारदर्शी प्रशासन और किए गए वादों के जवाबदेही की दरकार है। उन्होंने भाजपा नेतृत्व को नसीहत दी कि सेवा संकल्प का प्रचार करने के बजाय पहले जनता के बीच जाकर अपने पुराने वादों और मौजूदा सरकार के रिपोर्ट कार्ड का हिसाब प्रस्तुत करें।
