​JASHPUR REPORTER NEWS की खबर के बाद एक्शन में प्रशासन, 3 सदस्यीय उच्चस्तरीय टीम गठित

​जशपुर/फरसाबहार:- शिक्षा विभाग में नियमों के ‘दोहरे मापदंड’ और विकासखंड शिक्षा कार्यालय फरसाबहार में शिक्षकों के कथित मानसिक व आर्थिक शोषण का मामला अब जांच के दायरे में आ गया है। JASHPUR REPORTER NEWS द्वारा इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाए जाने के बाद जशपुर कलेक्टर रोहित व्यास ने सख्त कदम उठाते हुए मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच के लिए तीन सदस्यीय उच्चस्तरीय जांच समिति का गठन कर दिया है।

शिकायत से लेकर जांच तक का घटनाक्रम:

​05 अगस्त 2026: छ.ग. सहायक शिक्षक/समग्र शिक्षक फेडरेशन (ब्लॉक इकाई फरसाबहार) ने बीईओ (BEO) दुर्गेश देवांगन, एबीईओ (ABEO) और बीआरसीसी (BRCC) के खिलाफ सीएम कैम्प कार्यालय (बगिया) और जशपुर कलेक्टर को एक लिखित शिकायत सौंपी।

​14 अगस्त 2026: शिकायत के 10 दिन बीत जाने के बाद भी कोई कार्रवाई न होने से प्रशासन की कार्यप्रणाली पर संदेह उत्पन्न हो रहा था। मामले को संज्ञान में लेते हुए JASHPUR REPORTER NEWS ने “लाखों की वसूली और महिला शिक्षकों का मानसिक शोषण” शीर्षक से खबर प्रकाशित कर सिस्टम के उस दोहरे मापदंड को उजागर किया—जहां 15 मिनट की देरी पर शिक्षक निलंबित होते हैं, लेकिन भ्रष्टाचार के आरोपों पर अफसर सुरक्षित रहते हैं।

पूर्व में प्रकाशित खबर

​16 अगस्त 2026: खबर के प्रभाव से प्रशासन तत्काल हरकत में आया और जिला कलेक्टर ने आधिकारिक जांच के आदेश जारी कर दिए। कलेक्टर ने फेडरेशन के शिकायती पत्र को मुख्य आधार बनाते हुए, जिला पंचायत CEO की अध्यक्षता वाली समिति को 7 दिनों के भीतर विस्तृत और बिंदुवार जांच रिपोर्ट सौंपने का सख्त अल्टीमेटम दिया है।

3 सदस्यीय जांच समिति गठित

​आदेश के तहत गठित 3 सदस्यीय टीम इस प्रकार है:
​अध्यक्ष: मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO), जिला पंचायत, जशपुर
​सदस्य: जिला शिक्षा अधिकारी (DEO), जशपुर
​सदस्य: लेखाधिकारी, जिला पंचायत, जशपुर

​क्या है पूरा मामला?

​फरसाबहार के बीईओ (BEO) दुर्गेश देवांगन, एबीईओ (ABEO) और बीआरसीसी (BRCC) पर लंबे समय से बेहद गंभीर आरोप लग रहे थे। इन आरोपों में लाखों रुपये की कथित अवैध वसूली, निलंबन का भय दिखाकर शिक्षकों का मानसिक व आर्थिक शोषण और विशेष रूप से महिला शिक्षिकाओं को देर रात तक कार्यालय में बैठाकर प्रताड़ित करने जैसे संवेदनशील मामले शामिल हैं।
​एक तरफ जहां मामूली देरी या छोटी सी चूक पर शिक्षकों पर तत्काल निलंबन की गाज गिर रही थी, वहीं दूसरी ओर इन उच्चाधिकारियों पर किसी भी प्रकार की कार्रवाई अटकी हुई थी। सिस्टम के इसी ‘दोहरे मापदंड’ के उजागर होते ही पूरे प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया और आनन-फानन में जांच के निर्देश जारी किए गए।

फेडरेशन के ज्ञापन में लगाए गए प्रमुख आरोप:

​फेडरेशन के ब्लॉक अध्यक्ष नरेश कुमार यादव और अन्य पदाधिकारियों द्वारा सौंपे गए शिकायत पत्र में कई गंभीर आरोप दर्ज हैं:
​अधिकारियों द्वारा शिक्षकों को निरीक्षण, निलंबन, प्रतिकूल प्रतिवेदन तथा स्थानांतरण का भय दिखाकर मानसिक एवं आर्थिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा है।
​शासकीय कार्यों, निलंबन समाप्त कराने और PFMS भुगतान के नाम पर अनुचित आर्थिक लाभ की मांग की गई है।
​50,000 रुपये से लेकर 1,00,000 रुपये तक की भारी-भरकम राशि मांगने के गंभीर आरोप लगाए गए हैं।
​महिला शिक्षकों को देर रात तक कार्यालय में बैठाकर मानसिक रूप से प्रताड़ित किए जाने का स्पष्ट उल्लेख है।
​भ्रष्टाचार का विरोध करने वाले शिक्षकों को दंडात्मक कार्रवाई की धमकी दी जाती है।

कलेक्टर ने दिए जाँच के निर्देश देखें



7 दिनों का अल्टीमेटम और जगी न्याय की उम्मीद

​कलेक्टर के इस सख्त और त्वरित कदम के बाद पीड़ित शिक्षकों और फेडरेशन के पदाधिकारियों ने बड़ी राहत की सांस ली है। शिक्षक संघ का मानना है कि निष्पक्ष जांच की शुरुआत होना न्याय की दिशा में एक बेहद सकारात्मक कदम है। फेडरेशन ने निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने हेतु जांच अवधि तक संबंधित अधिकारियों को प्रशासनिक कार्यों से पृथक करने की मांग भी की है।
​अब पूरे जिले की निगाहें इस उच्चस्तरीय जांच टीम की अंतिम रिपोर्ट और उसके आधार पर दोषियों के खिलाफ होने वाली कड़ी कानूनी व प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।

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