
जशपुरनगर/कोतबा:-छत्तीसगढ़ शासन की महत्वाकांक्षी और गरीबों के लिए जीवनरेखा मानी जाने वाली सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के तहत मिलने वाले सस्ते और निःशुल्क अनाज पर भ्रष्टाचार के काले बादल मंडराने लगे हैं। जिले के विभिन्न ग्राम पंचायतों से लगातार राशन गबन की शिकायतें सामने आ रही हैं, इसी कड़ी में पत्थलगांव विकासखंड के ग्राम पंचायत खुटापानी से एक बड़ा मामला उजागर हुआ है। यहाँ राशन नहीं मिलने से आक्रोशित ग्रामीणों ने जमकर हंगामा किया और मजबूरन पंचायत प्रतिनिधियों को लिखित पंचनामा तैयार करना पड़ा।
खुटापानी पंचायत के लगभग 500 राशन कार्डधारियों को जुलाई माह का खाद्यान्न नहीं मिला है। ग्रामीणों का आरोप है कि जब उन्होंने राशन के संबंध में सरपंच और सचिव से बात की, तो उन्होंने ‘मशीन खराब होने’ का बहाना बनाकर उन्हें टाल दिया और लगातार गुमराह करते रहे।
ग्रामीणों का सवाल है कि यदि मशीन खराब होने के कारण राशन का वितरण नहीं किया गया, तो उस महीने का आवंटित राशन वर्तमान में कहाँ रखा हुआ है?
पंचायत में लगभग 500 कार्डधारी हैं। नियमानुसार प्रति कार्डधारी 35 किलो अनाज के हिसाब से जुलाई माह का कुल 17,500 किलो राशन (लगभग 175 क्विंटल) बनता है। बाजार मूल्य (26 रुपये प्रति किलो) के आधार पर इस हेराफेरी की अनुमानित कीमत 4 लाख 55 हजार रुपये आंकी जा रही है।
ग्रामीण महिलाओं में रामवती, कुंती और ललिता पैंकरा ने अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए बताया कि इस पंचायत में छत्तीसगढ़ के विशेष पिछड़ी जनजाति (राष्ट्रपति के दत्तक पुत्र कहे जाने वाले) कोरवा जनजाति के 10 से अधिक परिवार (तीन दर्जन से ज्यादा) निवास करते हैं।

ये परिवार पूरी तरह से सरकार द्वारा मिलने वाले इस सस्ते और निःशुल्क अनाज पर निर्भर हैं। ऐसे जरूरतमंद परिवारों को समय पर राशन से वंचित रखना उनके जीवन के साथ खिलवाड़ और उन्हें भूखा रखने के समान है।
ग्रामीणों ने यह भी खुलासा किया कि वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान अब तक के 20 महीनों में महज 5 महीने ही शक्कर और चने का वितरण किया गया है। शेष 15 महीनों से इन आवश्यक पोषक वस्तुओं का वितरण नहीं किया गया है, जिससे वितरण प्रणाली की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं।
हंगामे के बाद सरपंच का विवादित बयान और पंचनामा
बुधवार को बड़ी संख्या में एकत्रित ग्रामीणों ने पंचायत भवन के सामने जमकर विरोध प्रदर्शन और हंगामा किया। बढ़ते दबाव के बाद सरपंच और सचिव ने लिखित पंचनामा तैयार किया।
जब मीडिया ने सरपंच ऋषि पैंकरा से इस मामले पर सवाल किया, तो उनका बयान बेहद चौंकाने वाला था। उन्होंने स्वीकार किया कि:
”चाहे मुझे अपनी जेब से राशन खरीदकर ही क्यों न देना पड़े, मैं 16 अगस्त को जुलाई और अगस्त दोनों महीनों का राशन ग्रामीणों को वितरित करूंगा। मैं अपने बयान पर अडिग हूँ।”
सरपंच के इस बेतुके और असमंजस भरे बयान से ग्रामीणों का यह संदेह और पुख्ता हो गया कि स्टॉक में राशन पहले से ही गायब या ठिकाने लगाया जा चुका है, तभी वे बाहर से राशन खरीदकर देने की बात कह रहे हैं।
फिलहाल सरपंच द्वारा 16 अगस्त को राशन वितरण करने के लिखित आश्वासन के बाद ग्रामीण शांत हुए हैं। अब यह देखना बेहद दिलचस्प और महत्वपूर्ण होगा कि क्या सरपंच अपने वादे पर कायम रहते हुए दोनों माह का राशन वितरित कर पाते हैं, या फिर प्रशासन की जाँच के बाद इस बड़े घोटाले में लिप्त ज़िम्मेदार लोगों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाती है।
वर्शन..
ऋषि पैंकरा (सरपंच, ग्राम पंचायत खुटापानी):
“मैंने और सचिव ने ग्रामीणों को लिखित पंचनामा सौंप दिया है। हर हाल में 16 अगस्त को दोनों माह का राशन वितरित किया जाएगा। इसके लिए चाहे मुझे राशन खरीदकर लाना पड़े, मैं लाऊंगा।”
अजय प्रधान (खाद्य निरीक्षक, पत्थलगांव):
“POS मशीन खराब होना एक सामान्य तकनीकी बात है, जिसे कहीं भी सुधारा जा सकता है या इसकी सूचना हमें (विभाग को) दी जानी चाहिए थी। मशीन खराब होने का बहाना बनाकर एक महीने तक ग्रामीणों को राशन से वंचित रखना सरासर गलत है। इस पूरे मामले की उच्च स्तर पर निष्पक्ष जाँच की जाएगी।”
