
कोतबा: इंसान जब यह दुनिया छोड़ता है, तो श्मशान घाट ही उसका अंतिम पड़ाव होता है। इसे एक पवित्र और वैराग्य का स्थान माना जाता है, जहाँ हर कोई नतमस्तक होता है। जिसका सम्मान कर नगर पंचायत ने इसे मुक्ति धाम बनाया जिसे अब चोरों ओर नशेड़ियों ने खंडहर बना दिया है।लेकिन क्या हो जब इस अंतिम विश्राम स्थल को भी लालची निगाहें और चोर अपना निशाना बना लें?

कोतबा नगर में एक ऐसी ही बेहद शर्मनाक और अमानवीय घटना सामने आई है, जिसने संवेदनशीलता और इंसानियत दोनों को कटघरे में खड़ा कर दिया है। नगर के वार्ड क्रमांक 2 में स्थित एकमात्र मुक्ति धाम (श्मशान घाट) से चोरों ने ऐसी-ऐसी चीजें चुरा ली हैं, जिसके बारे में सुनकर हर कोई हैरान है। मौके से ली गई तस्वीरों और प्राप्त जानकारी के अनुसार, अज्ञात चोरों ने इंसान के अंतिम सफर में काम आने वाली बुनियादी चीजों को भी नहीं बख्शा है और श्मशान घाट को खंडहर बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी है।
0.चोरों ने मुक्ति धाम को कैसे बनाया खंडहर।
शवों की चिता को व्यवस्थित रूप से सजाने और जलाने के लिए लगाए गए लोहे के भारी गैटर ही चोरों ने उखाड़ लिए हैं। इसके बिना मृतकों के परिजनों को चिता सजाने में भारी मशक्कत और दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
नगर के शमसान घाट में बने एक मात्र काष्ठागार (जहाँ अंतिम संस्कार के लिए लकड़ियां रखी जाती हैं) के चैनल गेट गायब हैं। हैरानी की बात यह है कि एक दशक पहले बने इस मुक्ति धाम में नगर पंचायत ने आज तक लकड़ियां उपलब्ध नहीं कराई हैं। अब इस उपयोगविहीन और सुनसान भवन का फायदा चोर उठा रहे हैं।
प्शोक संतप्त परिजनों के बैठने के लिए बने कर्मचारी आवास सह प्रतीक्षालय के ग्रिल, दरवाजे और खिड़कियां भी चुरा ली गई हैं। यह जगह अब शराबियों का अड्डा बन गई है। रोजाना यहाँ शराबी आकर शराबखोरी करते हैं और शराब की बोतलें, डिस्पोजल आदि कचरा छोड़ जाते हैं। कई बार तो वे कांच की शीशियां फोड़ कर चले जाते हैं, जिससे यहाँ आने वाले मृतकों के परिजनों और आम नागरिकों को भारी परेशानी और खतरे का सामना करना पड़ता है।
पोस्टमार्टम गृह का ही कर दिया ‘पोस्टमार्टम
सबसे बड़ी हैरानी की बात यह है कि अति महत्वपूर्ण और संवेदनशील पोस्टमार्टम गृह के दरवाजे भी सुरक्षित नहीं रहे। यहाँ लगे लोहे के दरवाजों और खिड़कियों पर भी चोरों ने हाथ साफ कर दिया है।
0.प्रशासनिक अनदेखी या समाज का पतन।
हैरत की बात यह है कि इतनी भारी मात्रा में लोहे और खिड़की-दरवाजों की चोरी किसी एक दिन या एक रात में संभव नहीं है। यह घटनाक्रम अलग-अलग दिनों में धीरे-धीरे चलता रहा, लेकिन विडंबना देखिए कि किसी भी जिम्मेदार व्यक्ति या राहगीर का ध्यान इस ओर नहीं गया। जब परिसर पूरी तरह से खोखला दिखने लगा, तब जाकर लोगों की नींद टूटी है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए हाल ही में नगर पंचायत कोतबा के सीएमओ टी.आर. यादव ने कोतबा पुलिस चौकी में एक लिखित शिकायत दर्ज कराई है। उन्होंने अपनी शिकायत में चिता सजाने वाले गैटर और काष्ठागार भवन के चैनल गेट चोरी होने की बात प्रमुखता से रखी है।
0.क्या कहती है पुलिस?
इस अमानवीय कृत्य के पीछे किसका हाथ हो सकता है, इस विषय में चौकी प्रभारी ब्रजेश यादव ने बताया कि:
”नगर पंचायत की ओर से शिकायत प्राप्त हुई है और मामले की सघनता से जांच की जा रही है। प्रथम दृष्टया यह किसी पेशेवर गिरोह के बजाय नशे की गिरफ्त में पड़े बदमाशों या नशेड़ियों की हरकत लग रही है, जो अपने नशे की लत पूरी करने के लिए कबाड़ में लोहा बेच देते हैं। पुलिस हर संभावित एंगल से मामले की छानबीन कर रही है।
मुक्ति धाम जैसे पवित्र और संवेदनशील स्थान पर चोरी होना केवल एक आपराधिक घटना नहीं है, बल्कि यह हमारे समाज में गिरते नैतिक मूल्यों और नशे की बढ़ती प्रवृत्ति का एक डरावना सच है। नगरवासियों की प्रशासन से मांग है कि पुलिस जल्द से जल्द इन अज्ञात चोरों को सलाखों के पीछे डाले और यहाँ सुरक्षा के इंतजाम किए जाएं, ताकि भविष्य में इस तरह की अमानवीय घटनाओं पर लगाम लग सके और दिवंगतों के इस अंतिम विश्राम स्थल की गरिमा बनी रहे।
