जशपुरनगर:-छत्तीसगढ़ में ‘धर्म स्वतंत्रता अधिनियम’ को लेकर राजनीति गर्मा गई है। जशपुर में विपक्षी नेताओं ने सरकार की नीतियों पर कड़ा प्रहार करते हुए आरोप लगाया है कि राज्य सरकार अपनी विफलताओं को छिपाने के लिए सांप्रदायिक कार्ड खेल रही है। कांग्रेस ने सीधे मुख्यमंत्री विष्णु देव साय को घेरते हुए उनके शैक्षणिक पृष्ठभूमि पर सवाल उठाए हैं।
कांग्रेस के पूर्व जिलाध्यक्ष मनोज सागर यादव ने सरकार की नीयत पर सवाल उठाते हुए कहा कि जशपुर की फिजां में हमेशा से भाईचारा रहा है, लेकिन अब इसे बिगाड़ने की कोशिश की जा रही है।
”जब सरकार के पास बेरोजगारी, किसानों की बदहाली और गिरती अर्थव्यवस्था पर कोई जवाब नहीं होता, तब धर्म का सहारा लेकर माहौल गर्म किया जाता है। यह विकास का एजेंडा नहीं, बल्कि समाज को बांटने की राजनीति है।”
मुख्यमंत्री की शिक्षा पर सीधा हमला,लोयोला स्कूल से निकले, आज उसी व्यवस्था पर सवाल?”
कांग्रेस नेताओं ने 1954 से ईसाई समाज द्वारा शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में किए गए कार्यों का बचाव किया। सबसे तीखा हमला मुख्यमंत्री विष्णु देव साय पर करते हुए विपक्ष ने कहा कि यह राजनीति का दोहरा मापदंड है।
वक्ताओं ने कहा कि जशपुर के सुदूर अंचलों में जब कोई सुविधा नहीं थी, तब मिशन स्कूलों ने ‘शिक्षा की अलख’ जगाई।
विपक्षी नेताओं ने तंज कसा कि मुख्यमंत्री खुद लोयोला हायर सेकेंडरी स्कूल (मिशन स्कूल) से पढ़कर आज इस मुकाम पर पहुंचे हैं। जिस व्यवस्था ने उन्हें अवसर दिया और काबिल बनाया, आज सत्ता के लिए उसी व्यवस्था को कटघरे में खड़ा करना ‘कृतघ्नता’ और राजनीति का सबसे निचला स्तर है।
जशपुर की जनता न बंटेगी, न डरेगी: यू.डी. मिंज
जिलाध्यक्ष एवं पूर्व विधायक यू.डी. मिंज ने सरकार को स्पष्ट चेतावनी देते हुए कहा कि जशपुर की साझा संस्कृति को कानून के डर से नहीं तोड़ा जा सकता।
विपक्ष की मुख्य मांगें और आह्वान:
रोजगार पर ध्यान: सरकार धर्म के बजाय युवाओं को नौकरी देने पर बात करे।
किसानों की सुध: खाद-बीज और आय के साधनों पर ध्यान केंद्रित हो।
अखंडता का संकल्प: हर गांव से अब नफरत के खिलाफ और शिक्षा-स्वास्थ्य के समर्थन में आवाज उठेगी।

