जशपुरनगर/​पत्थलगांव:-स्थानीय तहसील कार्यालय इन दिनों भ्रष्टाचार और कार्यप्रणाली में सुस्ती को लेकर चर्चा का केंद्र बना हुआ है। ताजा मामला जमीन रजिस्ट्री के लिए आए पक्षकारों की भारी परेशानी और रसीद के नाम पर दोगुने पैसे ऐंठने के आरोपों से जुड़ा है, जिसने प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

सुबह से शाम तक का इंतजार और मानसिक प्रताड़ना

​विक्रेता गुरमीत बाई (पिता जेवन राम, जाति गोंड़) और क्रेता श्रीमती रीमा खाखा (पति अनीश एक्का) ने अपना आपबीती सुनाते हुए बताया कि वे जमीन संबंधी रजिस्ट्रेशन के लिए नियत समय पर तहसील कार्यालय पहुँच गए थे। उनके पास जमीन से जुड़े सभी वैध दस्तावेज मौजूद थे, इसके बावजूद उन्हें बिना किसी ठोस कारण के सुबह से शाम तक बैठाकर रखा गया।
​पीड़ितों का आरोप है कि उन्हें जानबूझकर ‘इधर से उधर’ घुमाया गया, जिससे उन्हें न केवल शारीरिक बल्कि मानसिक परेशानी का भी सामना करना पड़ा।

​अधिकारियों को ‘जानकारी का अभाव’ या टालमटोल की नीति?
​क्रेता और विक्रेता ने एक चौंकाने वाला दावा करते हुए कहा कि तहसीलदार मैडम को नियम-प्रक्रियाओं की सही जानकारी नहीं है, जिसके कारण वे छोटी-छोटी बातों के लिए अन्य अधिकारियों से सलाह लेती रहती हैं। इस प्रशासनिक अनुभवहीनता का खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ रहा है।”

​भ्रष्टाचार का बड़ा खेल: रसीद से दोगुने वसूली का आरोप..!

​तहसील कार्यालय के बाहर दबी जुबान में चर्चा है कि यहाँ स्टाम्प ड्यूटी और अन्य करों के नाम पर अवैध वसूली का खेल चल रहा है। लोगों ने साक्ष्यों के साथ बताया कि:
​यदि किसी रजिस्ट्री की आधिकारिक रसीद 10,000 रुपये की होती है, तो उसके बदले पक्षकारों से 20,000 रुपये (दोगुनी राशि) की मांग की जाती है।
​रसीद के नाम पर इस प्रकार की अवैध वसूली अब यहाँ आम बात हो गई है।

​आम जनता की मांग: जांच और कड़ी कार्यवाही..!
​पत्थलगांव तहसील में प्रतिदिन दर्जनों रजिस्ट्री और जमीन संबंधी मामले आते हैं, लेकिन कार्यों में गति न होने के कारण लोगों को हफ्तों भटकना पड़ता है। स्थानीय निवासियों और पीड़ितों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि ​तहसीलदार के नाम पर हो रही अवैध वसूली की निष्पक्ष जांच हो।
​कार्यालय में कार्यों के निपटारे के लिए समय-सीमा तय की जाए।लोगों का कहना है कि यहां इतनी बड़ी तादाद में जमीन रजिस्ट्री संबंधी कार्य होते है.उसके बावजूद यहां रजिस्ट्रार (पंजीयक) की स्थापना नही हुई है.जिसके कारण लोगों को गुमराह कर भटकाया जाता है.व अवैध वसूली को बढ़ावा मिल रहा है।
​पक्षकारों को परेशान करने वाले कर्मचारियों और बिचौलियों पर कड़ी कार्यवाही की जाए।
​अब देखना यह होगा कि उच्चाधिकारी इस गंभीर मामले पर क्या संज्ञान लेते हैं, या फिर पत्थलगांव की जनता इसी तरह व्यवस्था की चक्की में पिसती रहेगी।
मामले को लेकर पत्थलगांव तहसीलदार श्रीमती जयश्री राजन पथे ने कहा कि अपना पक्ष रखते हुए कहा कि वे कल अपनी निजी कार्य मे व्यस्त थी.वे दोपहर को कार्यालय पहुँची थी.उन्होंने कहा कि जो पक्षकार आये थे.उनका रजिस्ट्री हो गया था.अवैध उगाही व रसीद के दुगुने पैसों के लेनदेन की जानकारी नहीं हैं।

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